महावीर की शिक्षाएँ संसार में अधिकांश लोग ऐसे ही होते हैं जिन्हें स्वयं का ज्ञान नहीं होता, कि वे कैसे आए हैं , कहाँ से आए हैं और मरने के बाद कहां जाएंगे? हममे से अधिकां…
ईश्वर अन्यायकारी क्यों? प्रश्न्न- ईश्वर ऐसा अन्याय क्यों किया करता है? अर्थात् वह किसी को तो राजा बना देता है और किसी को प्रजा। किसी व्यक्ति को धन-धान्य से परिपूर्ण कर देता…
उससे बड़ा कोई नहीं परमात्मा एक बार ब्रह्म ने देवों पर प्रसन्न होकर उन्हें अपनी शक्ति प्रदान कर दी। ब्रह्म से शक्ति पाकर देवों ने असुरों को जीत लिया। उस विजय के फलस्वरू…
ईश्वर अव्यक्त रूप से कर्ता ईश्वर अव्यक्त रूप से कर्ता है। अधिकांशतः हम लोग अपने पड़ोसियों से अथवा माता पिता सुना करते थे कि सब कुछ ईश्वर करता है। उसकी मर्जी के बिना एक पत्ता …
पार्थिव अथवा परमतत्व पार्थिव अथवा परमतत्व सभी के दिल में राम होते हैं। इस बात को जरा गहराई से समझिएगा। राम का अर्थ है परमात्मा। और परमात्मा ही समस्त सृष्टि के उत्पत्ति का…
श्रीकृष्ण का दिगदर्शन श्रीकृष्ण का दिगदर्शन अर्जुन की पात्रता ही श्रीकृष्ण का साथ है। जो अर्जुन की तरह नहीं है, वह श्रीकृष्ण के पास होते हुए भी श्रीकृष्ण को नहीं पहचानता। …
गुरुर ब्रह्मा गुरुर ब्रह्मा जनसामान्य की दृष्टि से गुरु और गोविंद अलग-अलग हो सकते हैं। किंतु आध्यात्म की गहराई से देखा जाए तो गुरु और गोविंद कोई दो नहीं बल्कि एक …
स्वर्ग या परमतत्व ? स्वर्ग या परमतत्व कुछ लोगों को लगता है कि इस संसार में स्वर्ग ही सबसे बड़ा है। किंतु वास्तव में सबसे बड़ा और उत्तम निर्गुण ,निराकार परमात्मा ही है। स…
ईश्वर का दिगदर्शन ईश्वर का दिगदर्शन ईश्वर ना कोई व्यक्ति है और ना ही कोई वस्तु है जिसे तुम प्राप्त करना चाहते हो। ईश्वर तुम्हारे अंदर की वह ताकत है जो तुम्हें सत् प्र…